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भ्रामरी प्राणायाम



प्रणायाम मानव जीवन को एक वरदान के रूप में प्राप्त हु आ हैं। यह मानव जीवन को सकारात्मक ऊजाा से भर देता हैं। आज हम बात करे गे ‘भ्रामरी प्रणायाम’ के बारे में। भ्रामरी प्राणायाम मन को सन्तुलित करने एंव सजगता को अन्तमुाखी बनाने की ववधि हैं। हठ योग में भ्रामरी प्राणायाम का अत्यंत प्रभावशािी रूप में वणान ककया गया हैं। इस अभ्यास को सािने से नादयोग की ‘नाद ध्वनन ‘ का अनुभव होता हैं। नादयोग में जजन ध्वननयों का वणान ककया गया हैं वह सभी भ्रामरी प्राणायाम के उत्तम अभ्यास से आपको सुनाई देने िगती हैं। भ्रामरी कुम्भक लसद्ि होने से समाधि की लसद्धि हो जाती हैं।


जरा सौधिक जो अभ्यास आपको समाधि की प्राजप्त की ओर िे जा सकता हैं वह इस भौनतक जगत कक समस्याओं को हि करने के लिए ककतना प्रभावशािी होगा।


भ्रामरी प्राणायाम आपको रोग मुक्त कर आपके मानलसक स्वास््य को ठीक रखता हैं ।


इस भागदोड की जजंदगी में तनाव होना कोई बड़ी बात नही परंतुतनाव का हमेशा बने रहना ककसी बड़ी बबमारी का संके त हो सकता हैं। इसलिए भ्रामरी प्रणायाम को रोजाना करना आवश्यक हैं। यह आपके Mind को शांत करता हैं। सकारात्मकता बनाए रखता हैं।


रात को सोने से पहिे इसका अभ्यास करे जजससेआपको नींद की समस्या ना हो। पूरी रात तनाव मुक्त नीदं आपको आए


भ्रामरी प्राणायाम करने की विधि


Step-1 ककसी शांनत पूणा स्थान पर जाकर, आसन पर जाए, आप सुख पूवाक ककसी भी ध्यानासन में बैठ सकते हैं।


(जमीन पर बैठना सम्भव ना हो तो आप अपनी शारररीक स्वस््य के हहसाब से कुसी पर बैठ कर अभ्यास करे।


Step-2 अपने मेरू ठंड को सीिा रखे। दोनों हाथ ज्ञान मुद्रा में रखे। कुछ देर इस जस्थनत में बने रहे। अपने मन व शरीर को जस्थर करने का प्रयास करें


Step-3 मन शांत व शरीर में जस्थरता आजा ने के बाद दोनों हाथ ऊपर उठाते हुए अपने कानों के पास िे जाए और अँगूठे से कानो को बन्द करें, व शांभवी मुद्रा िगाइए।


Step-4 श्वास भरे और श्वास छोड़ते हुए भवरे के समान गुंजन करे ध्यान रहे जबड़ा ढीिा रखे। इसी प्रकार से 10 से 20 भार श्वास छोड़ते हुए गुंजन करें।


Step-5 अभ्यास पूणा होने के बाद कुछ देर उस सकारात्मक ऊजाा को महसूस करे, अनुभव करे इस प्राण रूपी शजक्त को जो आपके जीवन का सार हैं


यह प्राण रूपी शजक्त सम (Normal) हो जाने पर ककतना जस्थर हो जाते हैंअनुभव करे।


NOTE :- यहद आप भ्रामरी का अभ्यास िम्बे समय से कर रहे हैंतो आप कुम्भक भी िगाइए रेिक करने के बाद।


1. कुम्भककेसाथ बन्िों का अभ्यास भी करे


2. जािन्िर व मूि बन्ि िगाएंयहआपकी नाडडयों को अच्छेशुद्ि करेगा वआपकेिक्रको ऊजाावान करेगा।


आप धिककत्सा के रूप में भ्रमरी का अभ्यास कर रहे हैं तो 15 से 30 लमनट तक करे।


भ्रामरी के अभ्यास से रात को ननद्रा में कोई परेशानी नहीं आती हैं


भ्रामरी के गुंजन से Pineal gland में से कुछ हारमोन ननकिते हैंजो नीदं की समस्या को दरू करते हैंअच्छी नींद आती हैंव तनाव को कम करने में मददगार लसद्ि होते हैं।


वहटागो, सर ददा जैसी समस्या से आराम हदिाते हैं।


आपको कुछ ग्रंथ में शाम्भवी मुद्रा के साथ व शाम्भवी मुद्रा के बबना भी अभ्यास के लिए बोिा हैं दोनों ही ववधियां िाभकारी हैं।


मेरे अनुसार आप शाम्भवी मुद्रा के साथ अभ्यास करे क्योंकक योग में कोई भी एसी बात नही बताई गई हैं जो आपको िाभ ना दे।


उदाहरण :- हमारे िेहरे पर एक्यूप्रेशर पोस्टर व ममा बबन्दुहोते हैंजो शाम्भवी मुद्रा करते समय दबते हैंव िाभ देते हैं। जैसे नाक के पास जहाँहम (मध्यमा) अंगुलि रखते हैंवहां हमारा कड़ा गमा होता हैं जो Sinus को ठीक करने में िाभकारी हैं.

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